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।। लोटन सीएचसी की नाक के नीचे मौत का खेल: झोलाछाप की लापरवाही ने महिला को पहुँचाया मौत के मुहाने पर ।।

।। सिद्धार्थनगर का ‘खूनी’ क्लीनिक: अनफिट डॉक्टर के गलत इंजेक्शन ने गर्भ में ही बुझा दिया मासूम का दीया ।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। सिद्धार्थनगर: मौत का ‘क्लीनिक’ और सिस्टम का ‘मौन’! झोलाछाप के गलत इंजेक्शन ने गर्भ में ही उजाड़ दी दुनिया।।

सिद्धार्थनगर (लोटन)।। जिले के स्वास्थ्य महकमे की मेहरबानी कहिए या फिर जिम्मेदारों की ‘अंधभक्ति’, सिद्धार्थनगर में झोलाछाप डॉक्टरों का यमराज बनकर घूमना बदस्तूर जारी है। ताजा मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लोटन के चंद कदमों की दूरी पर स्थित चौरसिया क्लीनिक का है, जहाँ एक तथाकथित ‘अनफिट’ डॉक्टर की लापरवाही ने न सिर्फ एक कोख उजाड़ दी, बल्कि एक महिला को मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

गलत इंजेक्शन और फिर खून से लथपथ हुई मानवता

मिली जानकारी के अनुसार, एक गर्भवती महिला को इलाज के नाम पर इस मेडिकल स्टोरनुमा क्लीनिक पर लाया गया था। वहां मौजूद झोलाछाप ने बिना किसी विशेषज्ञता के महिला को इंजेक्शन ठोक दिया। परिणाम यह हुआ कि महिला की हालत बिगड़ गई और गर्भ में पल रहे मासूम की सांसें हमेशा के लिए थम गईं। अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) होने के कारण महिला की स्थिति नाजुक हो गई, जिसे आनन-फानन में लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।

CHC लोटन की चौखट पर ‘अवैध’ कारोबार

सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि जिस सीएचसी लोटन के कंधों पर इलाके की स्वास्थ्य व्यवस्था का जिम्मा है, उसके ठीक बगल में यह मौत का खेल कैसे चल रहा था? क्या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इन अवैध क्लीनिकों की आहट नहीं सुनाई देती? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के खेल ने विभाग की आंखों पर पट्टी बांध रखी है?

कागजों पर कार्रवाई, जमीन पर ‘कसाई’

महिला के परिजनों ने मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) से गुहार लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अक्सर देखा जाता है कि ऐसी घटनाओं के बाद विभाग जांच के नाम पर लीपापोती करता है और कुछ दिन बाद ये दुकानें फिर सज जाती हैं। लेकिन यहाँ सवाल एक अजन्मे शिशु की हत्या और एक परिवार की बर्बादी का है।

अजीत मिश्रा (खोजी) के तीखे सवाल:

क्या लोटन सीएचसी के अधिकारियों को अपने पड़ोस में चल रहे इस अवैध क्लीनिक की जानकारी नहीं थी?

आखिर जिला प्रशासन इन झोलाछाप ‘हत्यारों’ पर गैंगस्टर जैसी कार्रवाई क्यों नहीं करता?

अगर लखनऊ में इलाज के दौरान महिला को कुछ होता है, तो क्या विभाग इसकी जिम्मेदारी लेगा?

निष्कर्ष:

सिद्धार्थनगर का स्वास्थ्य ढांचा अब केवल ‘रेफर’ और ‘लापरवाही’ का केंद्र बनता जा रहा है। चौरसिया क्लीनिक जैसी दुकानें विभाग की मिलीभगत का जीता-जागता प्रमाण हैं। देखना यह है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है या भ्रष्ट तंत्र एक और फाइल दबाकर अगले हादसे का इंतजार करेगा।

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